Sunday, March 6, 2011

Result ke intezaar me

इंतज़ार का एक एक पल अब सदियों सा लगता है 
तेरे न आने से सब कुछ व्यतिथ सा लगता है 
अब तो आ जा मुझको तू ऐसे न तड़पा 
कुछ भी न भाये पढाई में रहता यही सदमा 
में भी जानना चाहू की हूँ इस पार या उस पार 
तुझे देखने की बेकरारी बड़ी है कब होगा तू तैयार
मुझे पता है की तू किस परिवेश में आएगा 
कितने ही चेहरों पैर खुसी और कितनो पैर मायूसी बिखेर जायेगा 
तेरे लक्षण कुछ ठीक मुझे अब जाने क्यूँ न लगते 
सोच है तेरी कुछ और हमारे खिले चेहरे नहीं जचते 
वैसे क्या दोष तुझको दूं ये तो मेरे कर्मो का फल है 
अच्छा मिला तो ठीक अन्यथा अंधकारमय कल है 
इतनी ही ख्वाहिश है की किसी को न निराश करना 
और सभी पर खुशियाँ न्योछावर करने में कोई देर न करना 

Result awaited by-
Deepsrijan 


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