Friday, May 20, 2011

मैंने महाविद्यालयओं में आधुनिकता का प्रभाव अति शीग्रता से अनुभव किया है उन्ही सर्वेक्षणों के आधार पर प्रथम लघुकथा को लिखा है "अनोखे रिश्ते " परीक्षा कि व्यस्तता के कारण अभी उसे टाइप नहीं कर पा रहा हूँ परन्तु उसी लघुकथा में से एक गीत जो मेरा प्रथम प्रयास है को पेश कर रहा हूँ




आँखों में अब मेरे चमक है 
तेरे कारण ऐसी महक है ये 
तुझ में जी लूं में हरेक पल 
भूल जाऊं क्या था में कल 

१ हरेक लम्हा मुझ पे वार दे 
ज़िन्दगी ये संवार दे 
एक हसीं ख्वाब बनकर तू हर दम दिखे 
कट जाये रातों का ये लम्बा सफ़र 
मुझ में खोजा तू इस कदर 
भूल जाऊं क्या था में कल 

२ मेरी छाया बनकर तू दिन भर चले 
 रात और दिन मेरे तुझ संग ढले 
  तू ही मेरे अब दोनों जहां 
 तुझ बिन मेरा ये जीवन कहाँ 
 मुझमे समाजा तू इस कदर 
 भूल जाऊं क्या था में कल 

तेरे कारण ऐसी महक है ये 
आँखों में अब मेरे चमक है 
तुझ में जी लूं में हरेक पल 
भूल जाऊं क्या था में कल 

Saturday, May 7, 2011

A 8 line poem on mothers day

माँ माता जननी मम्मी तेरे संबोधन अपार हैं 
तेरी दुआओं से ही तो मेरा यह सुखद संसार है 
हम तेरे बच्चे तेरी ही तो छाया हैं माँ
दुःख सहकर भी ख़ुशी देती ऐसा तेरा व्यव्हार है माँ 
मेरी गलतियों को हसकर टाल देती यही तो तेरा प्यार है माँ 
नारी से बढकर बहुत अधिक तू ही तो मेरा संसार है माँ
अंततः बस इतना ही करना चाहता हूँ काम 
मुझे यह संसार दिखाने वाली ऐ परम शक्ति तुझे मेरा शत शत प्रणाम 
-Deepsrijan