Thursday, August 4, 2011

ज़िन्दगी हर पल स्मृतियाँ

ये ज़िन्दगी उम्र में कुछ वर्ष जोड़ते जा रही है 
जाने कितनी यादें और शरीर से साथ छोडती जा रही है 
कुछ दुखमयी यादें जो दिल खुश कर जाती हैं 
कुछ प्रफुलित स्मृतियाँ जो आँखें आंसुओं से भर  जाती हैं 

वो लड़कपन वो बचपन कि सहजता कहाँ खो गयी है ?
युवा बनाकर क्या सोच और क्या उद्द्देश्य दे गयी है !
अनुभवों का बंटवारा और मामलों कि अनिजता कहाँ सो गयी है ?
स्वार्थ और अहं कि भावना क्यूँ प्रसून हो गयी है ?

यादों कि कश्ती को खेने वाले भी आप हैं 
इस अनोखे सफ़र का मजा लेने वाले भी आप हैं 
हजारों कमाकर भुगतान करने में असमर्थ भी आप हैं 
थोडा समय खर्च कर कमाने वाले भी आप हैं 

क्यूँ न याद करूँ उन यादों को 
क्यूँ न याद करूँ उन यादों को 
जो मन में मिठास घोलते जा रही हैं 
ये ज़िन्दगी भी उम्र में कुछ वर्ष जोड़ते जा रही है 

दीपसृजन