Saturday, September 8, 2012

A Tribute on Teachers Day

बहुत समय के बाद कुछ नया पोस्ट कर रहा हूँ 
अवसर भी काफी अच्छा है ........शिक्षक दिवस 
मेरी ज़िन्दगी में शिक्षक का योगदान अभी तक बहुत रहा है .....और उनसे मुझे अपार स्नेह और प्रेम मिला है ..!!!!
यह कविता उन सभी शिक्षकों को समर्पित है जिन्होंने मुझे पढाया या मार्गदर्शन दिया या कभी भी मुझसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 
जुड़े ..............!!!!!!!!


शिक्षक ही हैं ईश हमारे, शिक्षक ही भगवान् हैं
शिक्षक से ही तो हम हैं, शिक्षक से ही ये जहां हैं
सादगी की प्रतिमूर्ति , अनुशासन की पहचान हैं 
बिन शिक्षक के तुम बताओ कौन विद्यार्थी महान है 

शिक्षक ही है माता हमारी, शिक्षक ही हैं पिता हमारे 
लिखना पढना ज्ञान पाना सीखतें हैं हम इनके सहारे 
दुबे भंवर में यदि छात्र कभी तो लगाते हैं उसको किनारे
खुद मुश्किल में पडकर करते है मदद बिना सोचे बिना विचारे 
दूर कमजोरियों को कर छात्रों के होंसलों में भरते उड़ान हैं 
बिन शिक्षक के तुम बताओ कौन विद्यार्थी महान है ....

शिक्षक बनते सखा हमारे, हर मुश्किल को बनाते सुहानी 
पाश्चात्य को अपनाकर हमने तोड़ी ये रीत पुरानी........
जब हम छात्र छात्र नहीं रहे तो करते क्यूँ यह आस है 
शिक्षक तो इतना सहकर भी हर कदम पर हमारे पास है 
शिक्षक का सम्मान न करना बर्वादी के निशान हैं 
बिन शिक्षक के तुम बताओ कौन विद्यार्थी महान है .... 

शिक्षक, शिक्षक की भावनाओ का मिलकर हम सम्मान करें 
हाथ जोड़कर शीश नवाकर सहृदय प्रणाम करें 
फिर में यह कह सकता हूँ शिक्षक ही हमारी पहचान है 
शिक्षक के बलबूते पर ही हर विद्यार्थी महान है ........

दीपसृजन 

2 comments:

  1. अपने गुरु के प्रति यह आदर भाव आपको बहुत आगे लेजाएगा, प्रिय दीपेन्द्र ।

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    1. अपना कीमती वक़्त निकालकर मेरी इस कविता को पढने एवं प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद ...मौसीजी
      ईश्वर करे आगे भी आपको मेरी रचनायें पसंद आयें
      दीपेन्द्र

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